उत्कीर्णन
अनगिनत रेखाएँ केवल छाया का गाढ़ापन बदलकर एक देह बनाती हैं। सींगों की खाइयाँ, पंखों की झिल्ली, ज़ंजीर की कड़ियाँ, सब उसी सुई की लकीर हैं। चाँद ऊपर दाईं ओर पतला है। क़िला दूर है। बेल के पत्ते चौखट पर रेंगते हैं। रेखाओं के बीच का सफ़ेद वह कागज़ है जिसे अभी काटा नहीं गया। रेखाएँ एक-एक कर गिनिए, और बीच में एक रेखा आपकी त्वचा पर आगे बढ़ती है, उस दिशा में जो अभी सूखी नहीं।
- मूर्ख
- जादूगर
- उच्च पुजारिन
- साम्राज्ञी
- सम्राट
- उच्च पुजारी
- प्रेमी
- रथ
- शक्ति
- संन्यासी
- भाग्यचक्र
- न्याय
- लटका व्यक्ति
- मृत्यु
- संयम
- शैतान
- मीनार
- तारा
- चंद्रमा
- सूर्य
- निर्णय
- विश्व





















