जलरंग
पानी सूखने से पहले रंग रूपरेखा के पार निकल जाता है। पंखों का लाल रात के नीले में मिलता है। मशाल की आग एक बूँद बनकर नीचे बहती है। केवल ज़ंजीर की कड़ियाँ रहती हैं, सोना जो नहीं फैलता। पानी कागज़ के किनारे पर रुकता है। केवल उस किनारे का बाहर सूखा रहता है। जिस किनारे को आपने सूखा समझा था उसे दबाएँ, तो अभी गीली एक बूँद आपकी कलाई के आकार में फैलती है।
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