पुराने अस्तबल के केंद्र में एक चौकी खड़ी है, अनगिनत जूतों और टापों के दबाव से घिसी। लालटेन का प्रकाश उसकी सतह को छूता है, द्वार से प्रवेश करती हर हवा के साथ फड़फड़ाता हुआ। दो लोहे की ज़ंजीरें, जो कभी कस कर फंदे में थीं, अब घोड़े की काठी के पास ढीली लटकी हैं, उनका उद्देश्य घट गया जब सतर्कता फीकी पड़ी। इच्छा, बेचैन शिकारी कुत्ते की तरह, कमरे का चक्कर लगाती है। वह केवल देखे जाने पर वश में होती है, फिर भी उसे रोकने के औज़ार सदा पहुँच में बैठे हैं। काठी स्वयं, वर्षों की पालिश और पसीने से लचीली, तय की दूरी और ढोए बोझ की स्मृति लेकर चलती है। लालटेन की लौ की आभा, हथेली में थामे स्थिर, हवा पर छोड़ देने पर जंगली, निपुणता और समर्पण के बीच के विभाजन को रोशन करती है।
प्राचीन बाज़ार नगरों में काठी व्यापार और विश्वास का चिह्न थी। कारीगर उसे शुष्क मैदानों की लंबी यात्राओं के लिए गढ़ते थे, जहाँ यात्रियों ने सहनशक्ति की आवश्यकता और यह बुद्धि सीखी कि कब उतरना है। कथा में चौकी पर रखी मशाल रखवाले के बिना कभी नहीं जलती थी। अकेला छोड़ देने पर उसकी लौ या तो हवा खा जाती या बुझ जाती, और केवल सजग हाथ उसके प्रकाश को जीवित रखता था। ज़ंजीरों के लिए भी यही सच है। ढीली होने पर वे कोई ख़तरा नहीं बनतीं, उनकी परछाई कस कर जमी धरती पर केवल एक लहर। फिर भी एक क्षण की असावधानी और वे बाँध सकती हैं, हर कड़ी में खोदी मिथक की चेतावनी।
सीमा-भूमियों से एक पुरानी कथा है, जहाँ पशुओं के पथ नदी-तलों को काटते हैं और हवा चमड़े तथा धुएँ की गंध लेती है। नम दोपहरों तूफ़ानी बादल घिरते हैं पर कम ही फटते हैं। गड़रिये साज़-कक्ष की बेंच के चारों ओर इकट्ठे होते हैं, काठियाँ झाड़ते और किए तथा टूटे सौदों की कथाएँ कहते हुए। कोने की चौकी, बाड़े की लकड़ी जितनी मज़बूत उसी लकड़ी से तराशी, काठी और उन लोगों की स्मृतियाँ दोनों सहारा देती है जो बादलों भरे आकाश के नीचे भाग्य खोजने या क़र्ज़ से भागने सवार हुए। मशाल, राल में भीगी एक सादी लाठी, रात के पहले अँधेरे के लिए तैयार है, सदा उद्देश्य से जलाई और लापरवाह अलंकार के रूप में कभी जलती नहीं छोड़ी। हर वस्तु अनुष्ठान का हिस्सा है। मार्ग के लिए काठी, सावधानी के लिए ज़ंजीर, स्पष्टता के लिए मशाल।
घर में इन औज़ारों के प्रमाण टिके हैं। द्वार के पास लटकी लगाम, दहलीज़ पर जूता खुरचने वाला, काम की मेज़ पर विश्राम करता पुराने हथौड़े का चमड़े में बँधा हत्था। जो धागे इन चीज़ों को साथ थामे हैं वे दृश्य हैं, और उनके उधड़े सिरे सतर्कता की बात करते हैं। अपनी इच्छाओं को पहचानना, उनका आकार और उद्देश्य देखना, मशाल थामना और ज़ंजीर को ढीली रखना है। अस्तबल का सन्नाटा संतुलन का पाठ है। एक स्थान जहाँ पशु-स्वभाव विश्राम करता है, फिर भी सवारी करने या रोकने के साधन हाथ के निकट बने रहते हैं।
आज कोई अच्छी तरह घिसी पेटी को चमका सकता है, हर सिलवट और खाई पर ध्यान देते हुए। वे बोरे पर हुक या बकल कस सकते हैं, वस्तु का भार हथेली में बैठते महसूस करते हुए। वे लकड़ी की बेंच के पास बैठ कर चमड़े की पट्टी सी सकते हैं, या संध्या को मोमबत्ती जला कर देख सकते हैं कि लौ वायु की हर साँस का कैसे उत्तर देती है। हर छोटा कर्म इच्छा को स्पष्ट देखने का तरीक़ा है, न ठुकराया और न स्वयं समझ लिया, बल्कि अपने समय में औज़ार की तरह उपयोग किया।
आज का भाग्य रंग काठी भूरा है।
Lucky Color: SaddleBrown — #8B4513अपनी इच्छा को साधिए, और आपकी स्वतंत्रता आपकी है।