उल्टे खींचे प्रेमी गोधूलि की एक मौन रसोई में दो आकृतियों की तरह खड़े हैं। उनके बीच मेज़ सजी है, पर थालियाँ अछूती रहती हैं, कमरे में बैठी ख़ामोशी को प्रतिबिंबित करती हुई। बाहर सड़क नवंबर की देर दोपहर की धुंध में ढकी है, उस तरह का मौसम जो इमारतों और डालियों को एक समान ढक लेता है, हर खिड़की की कगार पर शहर की कालिख की एक परत छोड़ता है। हवा ठंडी है और अभी न गिरी बारिश की महक लिए है, वादा करती है पर रोक लेती है, और काँच के पार दुनिया अपने किनारों पर मिटती लगती है।
प्राचीन नदी घाटियों में व्यापारी कभी जेब में टिन के सिक्के लेकर राह नापते थे, पानी से सटे शहरों से होकर मार्ग खोजते हुए। सिक्के एक-दूसरे से ऐसे खड़खड़ाते थे जैसे मेज़ पर बैठे दोनों के दबे शब्द—इरादे आधे रास्ते तक लाए, विचार दूसरे किनारे को छूने से पहले काट दिए गए। उनके बीच राई की एक रोटी पड़ी है, उसकी पपड़ी खुरदरी और धब्बेदार, पोषण देती, यदि कोई उसकी ओर हाथ बढ़ाए। एक मूसल उठाता है, वर्षों के उपयोग से चिकना घिसा, उसकी मूठ टटोलता है पर दूसरे की नज़र नहीं मिलता। ओखली भारी और अचल बैठी है, काली मिर्च के दानों से भरी जो बिना पिसे रह जाते हैं, उनकी तीक्ष्णता भीतर कैद।
चूल्हे के ऊपर एक केतली प्रतीक्षा करती है, उसका इस्पात का शरीर समय से मंद, अब रोशनी नहीं पकड़ता। यह उस तरह का बर्तन है जो प्रतीक्षा जानता है, ठंडा होना जानता है, उन शब्दों को जानता है जो कभी ठीक से भाप नहीं बनते। अगले कमरे में एक ऊनी कंबल कुर्सी की बाँह पर ढेर है, उस तरह का जो चरवाहे कोहरे में बँधी ऊँची घास पार ले जाते थे, उसकी बुनावट घनी और सादी, गरमी देती है पर निमंत्रण नहीं। खिड़की के पार आकाश बादलों की छत है, घनी और नीची लटकी, उस तरह की जिसे नाविक तब देखते थे जब हवा भारी होती और साँस रोक लेती।
एक पहाड़ी गाँव में राजमिस्त्री के हाथ नदी के पत्थर चूल्हे में दबाते हैं, उनकी सतह न पूरी चिकनी, न पूरी खुरदरी, पर उसकी उँगलियों के नीचे हमेशा परिचित। वह मौन में काम करता है, एक ऐसा घर गढ़ता है जो आने वाले मौन को शरण देगा—उस तरह का जो सड़क किनारे सराय में अजनबियों के बीच अनजला लालटेन की तरह लोगों के बीच बैठ जाता है। इसी बीच शहर के भूले कोनों में पुराने अख़बारों के ढेर धूल समेटते हैं, शब्द कसकर बंद, पृष्ठ कभी नहीं पलटे, कथाएँ जो अपने पाठक तक कभी ठीक से पहुँचती नहीं।
जो कोई काम और निर्णय के बीच की शांत जगह में फँसा हो, उसके लिए छोटी बातें आज़माने लायक़ हैं। आप चूल्हे पर चायदान रख सकते हैं और उसके गर्म होने की प्रतीक्षा कर सकते हैं, उसकी स्थिरता में पहली हलचल सुनते हुए। आप रोटी की ओर हाथ बढ़ा सकते हैं, उसे तोड़कर पपड़ी बिखरने दे सकते हैं, बिना शब्दों का निमंत्रण। या कंबल और कसकर लपेटकर खिड़की के पास बैठ सकते हैं, जब धुंध भीतर आए, निगरानी रखने के काम में शांति पाते हुए। सिक्के छाँटने का काम भी—उन्हें पंक्ति में लगाना, ढेर करना, उनका भार महसूस करना—एक अलग तरह की बातचीत की शुरुआत चिह्नित कर सकता है।
आज का भाग्य रंग मद्धम स्लेटी है।
Lucky Color: DimGray — #696969शांत दूरियों के लिए एक रंग, उन शब्दों के लिए जो बोले जाने की प्रतीक्षा में हैं।
साथ खड़े रहिए, भले मौन टिका रहे।